भारत में क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य जानने के लिए करें इंतजार

सन 1992 के क्रिकेट विश्व कप के एक मैच में गाबा के मैदान पर जब दक्षिण अफ्रीकी क्षेत्ररक्षक जॉन्टी रोड्स ने पाकिस्तान के इंजमाम उल हक को पैविलियन की राह दिखाई तो सबकुछ इतना पलक झपकते हुआ कि आंखों देखा हाल सुनाने वाले भी चकित रह गए। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारतीय केंद्रीय बैंक की प्रतिक्रिया भी काफी हद तक वैसी ही है। इसके तेज उभार को देखते हुए रिजर्व बैंक चकित है: यह मुद्रा है? भुगतान व्यवस्था है? या संपत्ति है? ब्लॉकचेन डेटा प्लेटफॉर्म चेनालिसिस के मुताबिक देश में गत एक वर्ष में क्रिप्टो निवेश 200 गुना बढ़कर 20 करोड़ डॉलर से 40 अरब डॉलर पहुंच गया है। देश में 1.5 करोड़ से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी कारोबारी हैं, यह तादाद अमेरिका की दो तिहाई और ब्रिटेन से छह गुना अधिक है।
आरबीआई ने 31 मई को कहा कि अप्रैल 2018 के उसके जिस परिपत्र ने बैंकों को आभासी मुद्रा और किसी भी तरह के बिटकॉइन में कारोबार से प्रतिबंधित किया था अब वह वैध नहीं है और किसी बैंक को इसका सहारा लेकर क्रिप्टो को नकारना नहीं चाहिए। चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस परिपत्र को निरस्त किया था इसलिए निवेशक भी खुश थे।
परंतु यह खुशी क्षणिक थी क्योंकि केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि बैंकों को ऐसे मामलों में उचित क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? सतर्कता बरतते हुए ग्राहक को जानें (केवाईसी), मुद्रा विरोधी, आतंकवादियों को वित्तीय सहायता रोकने और धनशोधन रोकने संबंधी कानून तथा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का भी ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में बैंकों के लिए क्रिप्टोकरेंसी कारोबार लगभग असंभव हो गया।
आरबीआई ने अप्रैल 2018 समेत तीन विज्ञप्तियां जारी करके विनियमित संस्थानों और जनता को क्रिप्टोकरेंसी के जोखिम से अवगत कराया। ऐसे में कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों ने इनसे दूरी बना ली। आरबीआई क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ क्यों है? दरअसल वह न तो जिंस है और न ही मुद्रा, न ही भुगतान व्यवस्था का अंग। बिटकॉइन, इथीरियम, लाइटकॉइन, कार्डानो, पोल्काडॉट, स्टेलर आदि को वर्गीकृत करना मुश्किल है।
नियामक इसे मुद्रा नहीं मानता क्योंकि इसे किसी केंद्रीय बैंक ने जारी नहीं किया और इसे कोई संप्रभु समर्थन हासिल नहीं है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव है, भंडारण मूल्य कमजोर है और यह व्यापक रूप से स्वीकार्य नहीं है। यह क्रेडिट-डेबिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की तरह भुगतान प्रणाली का अंग भी नहीं है।
लेनदेन गुमनाम होने के कारण वे सार्वजनिक निगरानी के दायरे में नहीं होते। इसका केवाईसी मानकों पर गहरा असर होता है और धनशोधन तथा आतंकियों की मदद का जोखिम भी पैदा हो जाता है। गुमनामी की प्रकृति, पूंजी नियंत्रण व्यवस्था के अनुरूप नहीं है क्योंकि लेनदेन की पड़ताल संभव नहीं। अगस्त 1993 से ही देश में चालू खाते की पूर्ण परिवर्तनीयता है लेकिन पूंजी खाते की परिवर्तनीयता अभी प्रक्रियाधीन है। यह परिवर्तनीयता हमें यह आजादी देती है कि रुपये को किसी भी अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकार्य मुद्रा में बदलें। यह हर जगह निवेश का अबाध लेनदेन सुनिश्चित करती है।
आरबीआई के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी को परिसंपत्ति नहीं माना जा सकता क्योंकि वहां भविष्य में नकदी प्रवाह की व्यवस्था नहीं, उसका मूल्य अटकलों के कारण चढ़ता गिरता है। उपभोक्ताओं को भी कोई संरक्षण नहीं है। एक बार पासवर्ड गलत हाथ में पडऩे पर कुछ भी हो सकता है। इनमें ऊर्जा खपत बहुत अधिक होती है।
फरवरी में राज्य सभा में एक प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, ‘आर्थिक मामलों के सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर मंत्रालयीन समिति का गठन किया गया ताकि वह आभासी मुद्राओं का अध्ययन करके रिपोर्ट दे। समिति ने कहा कि सरकार द्वारा प्रचलित आभासी मुद्रा के अलावा ऐसी तमाम मुद्राओं पर भारत में रोक लगाई जाए।’ आरबीआई के अलावा पूंजी बाजार नियामक और बीमा नियामक के अधिकारी भी समिति में थे। समिति के मन में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कई संशय थे कि यह वित्तीय क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है। हालांकि वह ऐसी मुद्रा के पीछे की तकनीक यानी ब्लॉकचेन के खिलाफ नहीं थी।
ब्लॉकचेन प्रणाली में सूचना बहुत सुरक्षित रहती है। समिति भूमि रिकॉर्ड रखने जैसे उद्देश्यों के लिए ब्लॉकचेन तकनीक की क्षमताओं का लाभ उठाने के पक्ष में है। समिति ने केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा की अनुशंसा की है। यह डिजिटल मुद्रा आरबीआई द्वारा जारी वॉलेट या इलेक्ट्रॉनिक बटुआ होगा। फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंगलैंड और यहां तक कि यूरोपीय केंद्रीय बैंक सभी बहुत धीमी गति से इस दिशा में (केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा) बढ़ रहे हैं जबकि चीन पहले ही डिजिटल युआन को प्रायोगिक तौर पर जारी कर चुका है।
आरबीआई के गहन पूर्वग्रह के बाद भी भारतीयों का क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बढ़ा है, हालांकि हम अन्य देशों से पीछे हैं। चेनालिसिस के मुताबिक हम बिटकॉइन के मामले में 2020 में 25 देशों में से 18वें स्थान पर रहे। अमेरिका 4.1 अरब डॉलर के साथ शीर्ष पर है, जबकि चीन 1.1 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। जापान 90 करोड़ डॉलर के साथ तीसरे, ब्रिटेन 80 करोड़ डॉलर के साथ चौथे और रूस 60 करोड़ डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर है। ब्लूमबर्ग ने हाल में क्रिप्टो में 10 लाख डॉलर निवेश करने वाले एक बैंकर के हवाले से कहा कि फिलहाल आय कर के कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं और उसे डर है कि अगर उसका नाम बड़े क्रिप्टो निवेशक के रूप में आया तो अतीत से प्रभावी कर लग सकता है। अगर कोई प्रतिबंध लगता है तो वह अपना कारोबार सिंगापुर के बैंक खाते में स्थानांतरित कर लेगा।
संसद के बजट सत्र में क्रिप्टोकरेंसी और आधिकारिक डिजिटल करेंसी नियमन विधेयक 2021 पेश होना था लेकिन सरकार अभी भी चर्चा ही कर रही है। अनुमान है कि सरकार सभी क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लगाकर अपनी डिजिटल मुद्रा लाएगी। परंतु क्या सरकार क्रिप्टो पर प्रतिबंध लगाएगी? यह जानने के लिए हमें प्रतीक्षा करनी होगी।

India At 2047: भारत कैसे क्रिप्टो सेक्टर पर रख रहा है सतर्क रुख, अन्य देशों को लेनी चाहिए सीख

Looking Ahead, India@2047: भारत ने अब तक क्रिप्टो करेंसी के नियामक के लिए मिलेजुले संकेतों की पेशकश की है और समय लिया है ताकि यह उद्योग के साथ-साथ निवेशकों के हितों की रक्षा भी कर सके.

By: प्रशांत कुमार | Updated at : 10 Aug 2022 05:00 PM (IST)

Edited By: Meenakshi

Crypto Regulation: क्रिप्टोकरेंसी सुर्खियों में हैं जब से सुप्रीम कोर्ट ने 2020 की शुरुआत में उन पर पूर्ण प्रतिबंध हटा दिया है. 2021 में एक्सचेंजों और तेजी से बढ़ते बाजारों के प्रसार के साथ, क्रिप्टोकरेंसी के नाम से कोई अनजान नहीं है. भारत में देर से प्रवेश करने के बावजूद क्रिप्टो दुनिया को खुले हाथों से अपनाया और आज लगभग 27 मिलियन भारतीय हैं जो क्रिप्टो संपत्ति रखते हैं, मुख्यतः टियर II और टियर III शहरों में. बता दें कि देश में एक्टिव डीमैट खातों की संख्या भी इससे थोड़ी ही ज्यादा है जो देश में दशकों से क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? मौजूद हैं.

क्रिप्टो के क्षेत्र में केंद्र ने अभी तक क्या कदम उठाए हैं
क्रिप्टोकरेंसी ऐसेट करेंसी और टेक्नोलॉजी का एक बहुत ही दिलचस्प संकेत है. वित्त मंत्रालय द्वारा अब तक उठाए गए कदमों को करीब से देखने से पता चलता है कि हमारे करेंसी रेगुलेटर तीन पहलुओं को अलग तरह से देखते हैं. ऐसा लगता है कि यह मूल कारण है कि भारत ने अब तक क्रिप्टो करेंसी के नियामक के लिए मिलेजुले संकेतों की पेशकश की है और समय लिया है ताकि यह उद्योग के साथ-साथ निवेशकों के हितों की रक्षा भी कर सके.

देश में क्रिप्टो पर टैक्स का उठा कदम
यदि हम पिछले केंद्रीय बजट के दौरान की गई सभी घोषणाओं को करीब से देखें तो पाएंगे कि ज्यादातर शोर क्रिप्टो ऐसेट्स के टैक्सेशन के आसपास रहा है. हालांकि क्रिप्टो पर टैक्स एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है जिसे तब से आरबीआई ने भी इसे बार-बार दोहराया है. फिर भी ये कहना ज्यादा सही होगा कि ब्लॉकचेन पर बेस्ड क्रिप्टोकरेंसी, करेंसी के मौजूदा डिजिटल संस्करण की तुलना में एडवांस्ड हैं और भारत (हमेशा की तरह) एक नई तकनीक को अपनाने के लिए खुले मन से तैयार है.

वैध डिजिटल ऐसेट के रूप में सामने आ रही है क्रिप्टो
एक और पहलू देखें तो इसे एक संपत्ति के रूप में मानने और इस पर टीडीएस और टैक्स लगाने से ये वैध ऐसेट क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? के रूप में स्थापित हो सकता है. हालांकि यह तर्क दिया जा सकता है कि क्या दरें ऊंची या कम) हैं? क्या नीति निर्माताओं को उन्हें एसटीसीजी और एलटीसीजी के समान व्यवहार करना चाहिए, क्रिप्टो पर टैक्सेशन इसे अनुमोदित करने का रेगुलेटर का तरीका है. इससे इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि अब यह किसी के लिए व्यापार करने और क्रिप्टो के मालिक होने के लिए पूरी तरह से वैध है. ये शुरुआती दिन हैं और समय बीतने के साथ और बढ़ती समझ के साथ, टैक्सेशन धीरे-धीरे अधिक निवेशक अनुकूल हो जाएगा.

निवेशकों को ना हो परेशानी
यह हमें एक मुद्रा के रूप में क्रिप्टो के तीसरे पहलू को भी सामने लाता है जिसमें कुछ देशों के विपरीत हमारे रेगुलेटर मजबूत रहे हैं. क्रिप्टो करेंसीज मूल्य का एक अत्यधिक लिक्विड भंडार हैं, और हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि यह भारत और विदेशों में समान रूप से निवेशकों को ट्रीट कर सके. साथ ही ये पक्का कर सके कि क्रिप्टो की सहज कमी की कोई परेशानी नहीं है

भारत और क्रिप्टो-आगे क्या भविष्य है
वित्त मंत्री ने पिछले महीने क्रिप्टो पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बारे में बात की थी. भारत को अपने पड़ोसियों सिंगापुर और दुबई से आगे नहीं देखना चाहिए ये वो दो देश हैं जो अब सही तरीके से क्रिप्टो क्रांति का नेतृत्व करने में सबसे आगे हैं. क्रिप्टोकरेंसी एक बहुत ही दिलचस्प दोहरे व्यवहार को प्रदर्शित करता है जिसमें एक तरफ यह सभी को दिखाई देता है, लेकिन दूसरी ओर यह तब तक जिम्मेदार नहीं है जब तक यह ब्लॉकचेन पर आधारित रहता है. ये ही असल में विवाद की जड़ है और सरकार को ढांचा तैयार करना चाहिए, एक्सचेंजों के साथ साझेदारी करनी चाहिए और लाइसेंस जारी करना चाहिए ताकि हमारी (और अन्य) जैसी कंपनियां हमारे नियामकों की सुविधा के रूप में कार्य कर सकें और भारत को ब्लॉकचेन तकनीक के साथ आगे ला सकें.

अन्य देशों में क्रिप्टो की स्थिति
क्रिप्टो को अब तक विभिन्न देशों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है. अल साल्वाडोर अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ बिटकॉइन को लीगल टेंडर के रूप में अपनाने वाला पहला देश बन गया, हालांकि, इसे भारी नुकसान हुआ. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और कई क्रेडिट एजेंसियों की आलोचनाओं के बावजूद, मध्य अमेरिकी राष्ट्र ने बीटीसी को अपने राष्ट्रीय रिजर्व में जोड़ना जारी रखा और यहां तक ​​​​कि बिटकॉइन सिटी नामक एक क्रिप्टो ट्रेडिंग हब स्थापित करने की योजना का खुलासा किया. हालांकि, हाल ही में बीटीसी की कीमतों में गिरावट और कुल क्रिप्टो बाजार में गिरावट के कारण, देश के निवेश का मूल्य कम हो रहा है जिनकी अनुमानित रूप से कीमत 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा है. दूसरी ओर चीन है, जो क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और इसके विभिन्न पहलुओं पर नाटकीय रूप से अपने रुख से पलटा है, इतना अधिक कि क्रिप्टो व्यापारियों और खनिकों को अंततः देश से बाहर जाना पड़ा और अपने व्यवसाय को जारी रखने के लिए अन्य दक्षिण एशियाई देशों में ठिकाने स्थापित करने पड़े.

भारत के लिए क्रिप्टो पर सतर्कता अच्छी साबित हुई
क्रिप्टोक्यूरेंसी और इसके विभिन्न पहलुओं के लिए भारत के सतर्क दृष्टिकोण को अन्य सरकारों के लिए सीखने की अवस्था के रूप में माना जा सकता है. इस क्षेत्र को पूरी तरह से अपनाने या बैन करने का फैसला लेने से पहले समर्पित रिसर्च करनी बेहद जरूरी है जो भारत सरकार कर रही है.

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Published at : 10 Aug 2022 04:44 PM (IST) Tags: India Nirmala Sitharaman Cryptocurrency Bitcoin RBI FM digital currency Dogecoin Tether India at 2047 Crypto Regulation हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: India-at-2047 News in Hindi

सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी और क्रिप्टोकरेंसी का फ्यूचर, क्या है कनेक्शन, यहां समझिए

दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज में से एक एफटीएक्स के फाउंडर सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी के बाद अब क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. आखिर इन दोनों बातों के बीच का कनेक्शन क्या है. यहां आप हर बात को समझ सकते हैं.

सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी और क्रिप्टोकरेंसी का फ्यूचर, क्या है कनेक्शन, यहां समझिए

फ्यूचर की करेंसी यानी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency), जब से दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज में से एक एफटीएक्स (FTX) के फाउंडर सैम बैंकमैन-फ्राइड (Sam Bankman-Fried) की गिरफ्तारी हुई है. इस टेक करेंसी की वैल्यू और फ्यूचर दोनों को लेकर ही नए सवाल खड़े हो गए हैं. क्या इन सवालों का कोई उत्तर भी है ? यहां समझिए…

सैम बैंकमैन-फ्राइड पर वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप है. ये अमेरिका के अब तक के सबसे बड़े ऐसे मामलों में से एक है. उनके खिलाफ इस मामले में एक आपराधिक केस भी चल रहा है.

‘धोखे की नींव पर बनाया महल’

अमेरिकी जांच एजेंसी के अधिकारियों ने सोमवार को बहामास में अमेरिकी उद्यमी और पूर्व अरबपति की गिरफ्तारी से पहले उस पर “धोखे की नींव पर महल बनाने” का आरोप लगाया. सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी कई चौंकाने वाले खुलासे के बीच हुई है, जैसे कि सैम बैंकमैन-फ्राइड ने अपने ग्राहकों को जानकारी दिये बिना अरबों डॉलर अपने निजी फर्म अल्मेडा रिसर्च में ट्रांसफर की.

रॉयटर्स ने बुधवार को बताया कि हेज फंड अल्मेडा रिसर्च के एक विशेषाधिकार ने उसके मालिक सैम बैंकमैन-फ्राइड को ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर “लगभग असीमित लाइन ऑफ क्रेडिट” दे दिया. माना जाता है कि एफटीएक्स के चीफ इंजीनियर निषाद सिंह ने प्रोग्राम में हेर-फेर करके यह बदलाव लाया और फाउंडर को लिखा, ‘अतिरिक्त सावधान रहें, कहीं दिवाला ना निकल जाए’

कहीं डिग ना जाए लोगों का भरोसा!

इस चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों का अविश्वास और डिग सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी को और विकसित बनाकर निवेशकों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए. स्थायित्व लाना जरूरी है, केवल अच्छे दृष्टिकोण से काम नहीं चलेगा.

बगैर जवाबदेही और नैतिकता के अपना व्यवसाय चला रहे सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी ने कम वक्त में अधिक पैसा कमाने में लगे लोगों को इसके खतरों से दो-चार कराया है. इसमें निवेश से पहले क्रिप्टोकरेंसी के वास्तविक मूल्य को जानने की जरूरत है. इस मामले के बाद निश्चित रूप से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों की धारणा डिग गई है.

लगातार बढ़ रहा क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा जोखिम

वर्जीनिया विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले लियाम बोर्के ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखा, “एफटीएक्स के दिवालिया होने और बिकने से कई लोग इस पर दोबारा सोचने को मजबूर होंगे. इसमें स्पेक्यूलेटिव गेन यानी सट्टा क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? लाभ की स्थिति नहीं है. इसमें भविष्य अनिश्चित है और इसे रखने वाले के नेट वर्थ में कोई इजाफा नहीं होता.

पारंपरिक मुद्रा की तुलना में इसमें जोखिम भी काफी ज्यादा है. कई क्रिप्टोकरेंसी पहले ही अपने अंकित मूल्य से काफी नीचे आ गई हैं. इनके साथ जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं. इन मुद्राओं का मूल्य ताश के पत्तों की तरह लगातार धराशायी होता जा रहा है. इससे लोगों का क्रिप्टोकरेंसी पर विश्वास लगातार कम हो रहा है.

जैसे-जैसे अमेरिकी जांच एजेंसियां और अदालतें दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनांस में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों और प्रतिबंधों का उल्लंघन करने संबंधी जांच और सुनवाई पूरी कर रही हैं, क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य उज्ज्वल नजर नहीं आ रहा है.

निवेशकों की क्रिप्टो बाजार के लिए नियमों की मांग

निवेशक और वित्त विशेषज्ञ क्रिप्टो बाजार को लेकर नियमों की मांग कर रहे हैं, ताकि सब कुछ जनता की नजरों के सामने रहे यानी जवाबदेही बनी रहे. हालांकि, आगे का रास्ता लंबा और अनिश्चित लग रहा है. क्रिप्टो बाजारों को लेकर एजेंटों-डीलरों, एक्सचेंजों और उधार देने के बेहतर नियम से उम्मीद है कि लोगों का विश्वास लौट सकता है.

हालांकि, कई लोगों का मानना है कि एफटीएक्स प्रकरण क्रिप्टोकरेंसी के खात्मे को लेकर ताबूत की आखिरी कील है. इन दिनों उनकी कीमतें अपने सबसे निचले स्तर पर हैं. इस साल की पहली छमाही में बिटकॉइन और एथेरियम ने 2021 के अंत में अपने हमेशा के उच्च स्तर से 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की.

सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी और क्रिप्टोकरेंसी का फ्यूचर, क्या है कनेक्शन, यहां समझिए

दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज में से एक एफटीएक्स के फाउंडर सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी के बाद अब क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. आखिर इन दोनों बातों के बीच का कनेक्शन क्या है. यहां आप हर बात को समझ सकते हैं.

सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी और क्रिप्टोकरेंसी का फ्यूचर, क्या है कनेक्शन, यहां समझिए

फ्यूचर की करेंसी यानी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency), जब से दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज में से एक एफटीएक्स (FTX) के फाउंडर सैम बैंकमैन-फ्राइड (Sam Bankman-Fried) की क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? गिरफ्तारी हुई है. इस टेक करेंसी की वैल्यू और फ्यूचर दोनों को लेकर ही नए सवाल खड़े हो गए हैं. क्या इन सवालों का कोई उत्तर भी है ? यहां समझिए…

सैम बैंकमैन-फ्राइड पर वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप है. ये अमेरिका के अब तक के सबसे बड़े ऐसे मामलों में से एक है. उनके खिलाफ इस मामले में एक आपराधिक केस भी चल रहा है.

‘धोखे की नींव पर बनाया महल’

अमेरिकी जांच एजेंसी के अधिकारियों क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? ने सोमवार को बहामास में अमेरिकी उद्यमी और पूर्व अरबपति की गिरफ्तारी से पहले उस पर “धोखे की नींव पर महल बनाने” का आरोप लगाया. सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी कई चौंकाने वाले खुलासे के बीच हुई है, जैसे कि सैम बैंकमैन-फ्राइड ने अपने ग्राहकों को जानकारी दिये बिना अरबों डॉलर अपने निजी फर्म अल्मेडा रिसर्च में ट्रांसफर की.

रॉयटर्स ने बुधवार को बताया कि हेज फंड अल्मेडा रिसर्च के एक विशेषाधिकार ने उसके मालिक सैम बैंकमैन-फ्राइड को ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर “लगभग असीमित लाइन ऑफ क्रेडिट” दे दिया. माना जाता है कि एफटीएक्स के चीफ इंजीनियर निषाद सिंह ने प्रोग्राम में हेर-फेर करके यह बदलाव लाया और फाउंडर को लिखा, ‘अतिरिक्त सावधान रहें, कहीं दिवाला ना निकल जाए’

कहीं डिग ना जाए लोगों का भरोसा!

इस चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों का अविश्वास और डिग सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी को और विकसित बनाकर निवेशकों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए. स्थायित्व लाना जरूरी है, केवल अच्छे दृष्टिकोण से काम नहीं चलेगा.

बगैर जवाबदेही और नैतिकता के अपना व्यवसाय चला रहे सैम बैंकमैन-फ्राइड की गिरफ्तारी ने कम वक्त में अधिक पैसा कमाने में लगे लोगों को इसके खतरों से दो-चार कराया है. इसमें निवेश से पहले क्रिप्टोकरेंसी के वास्तविक मूल्य को जानने की जरूरत है. इस मामले के बाद निश्चित रूप से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों की धारणा डिग गई है.

लगातार बढ़ रहा क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा जोखिम

वर्जीनिया विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले लियाम बोर्के ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखा, “एफटीएक्स के दिवालिया होने और बिकने से कई लोग इस पर दोबारा सोचने को मजबूर होंगे. इसमें स्पेक्यूलेटिव गेन यानी सट्टा लाभ की स्थिति नहीं है. इसमें भविष्य अनिश्चित है और इसे रखने वाले के नेट वर्थ में कोई इजाफा नहीं होता.

पारंपरिक मुद्रा की तुलना में इसमें जोखिम भी काफी ज्यादा है. कई क्रिप्टोकरेंसी पहले ही अपने अंकित मूल्य से काफी नीचे आ गई हैं. इनके साथ जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं. इन मुद्राओं का मूल्य ताश के पत्तों की तरह लगातार धराशायी होता जा रहा है. इससे लोगों का क्रिप्टोकरेंसी पर विश्वास लगातार कम हो रहा है.

जैसे-जैसे अमेरिकी जांच एजेंसियां और अदालतें दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनांस में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों और प्रतिबंधों का उल्लंघन करने संबंधी जांच और सुनवाई पूरी कर रही हैं, क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य उज्ज्वल नजर नहीं आ रहा है.

निवेशकों की क्रिप्टो बाजार के लिए नियमों की मांग

निवेशक और वित्त विशेषज्ञ क्रिप्टो बाजार को लेकर नियमों की मांग कर रहे हैं, ताकि सब कुछ जनता की नजरों के सामने रहे यानी जवाबदेही बनी रहे. हालांकि, आगे का रास्ता लंबा और अनिश्चित लग रहा है. क्रिप्टो बाजारों को लेकर एजेंटों-डीलरों, एक्सचेंजों और उधार देने के बेहतर नियम से उम्मीद है कि लोगों का विश्वास लौट सकता है.

हालांकि, कई लोगों का मानना है कि एफटीएक्स प्रकरण क्रिप्टोकरेंसी के खात्मे को लेकर ताबूत की आखिरी कील है. इन दिनों उनकी कीमतें अपने सबसे निचले स्तर पर हैं. इस साल की पहली छमाही में बिटकॉइन और एथेरियम ने 2021 के अंत में अपने हमेशा के उच्च स्तर से 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की.

क्रिप्टो करेंसी के फायदे , क्रिप्टो करेंसी के नुकसान ओर क्रिप्टो का भविष्य क्या है बताइए

आप इस पोस्ट में जानेंगे क्रिप्टो करेंसी के फायदे ,क्रिप्टो करेंसी के नुकसान । कई लोग का यह भी प्रश्न रहता है कि कृपया करेंसी का भविष्य क्या है। आपको बता दूं मैं, क्रिप्टो करेंसी आने वाले समय का सबसे बड़ा जायदाद होगा। लोग आज क्रिप्टोकरंसी को छोटी नजर से देख रहे हैं लेकिन आने वाले समय में भविष्य की बात करें तो क्रिप्टो से बड़ा बाजार दूसरा कुछ नहीं हो सकता।

वैसे तो भारत ने भी यह स्वीकार किया है कि क्रिप्टो करेंसी आने वाला भविष्य है तभी भारत ने भी क्रिप्टो करेंसी को बैन नहीं किया और क्रिप्टो करेंसी को चालू रखा और उसके ऊपर बड़ी रकम क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? की टैक्स वसूली कर रहा है..

Table of Contents

क्रिप्टो करेंसी के फायदे

● ये एक ऑनलाइन Currency होने के कारण है, धोखाधड़ी और इसकी नकली करेंसी बनने के चांस कम है।
● क्रि प्टो करेंसी एक स्ट्रांग एंड अन्य सामान्य digital payment से ज्यादा सुरक्षि त माना जाता है।
● क्रि प्टो करेंसी की कीमत बहुत तेजी से दि न ब दि न बढ़ रही है, इसलि ए इन्वेस्ट करने के लि ए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जो फ्यूचर में काफी फायदेमंद साबि त हो सकता है।
● Cryptocurrency की ट्रांसफर और लेन देन बहुत सुरक्षि त है, यह सामान्य लेन देन से बिल्कुल भिन्नऔर ज्यादा सुरक्षित है।
● कोई मेडि एटर नहीं होता है।
● यह ग्लोबल में नहीं है।
● ट्रांजैक्शन फीस बहुत ही है और ट्रांजैक्शन जल्दी और आसानी से होता है। क्रिप्टो करेंसी का गेर-लाभ
● इसमें रि वर्स ट्रांजैक्शन का ऑप्शन नहीं होने के, अगर गलती ट्रांजैक्शन हो जाता है तो आप को बहुत

क्रिप्टो करेंसी के नुकसान

क्रिप्टो करेंसी से भारी नुकसान हो सकता है।

● ऑनलाइन करेंसी होने के कारण क्रि प्टोकरेंसी का मुद्रण नहीं कि या जा सकता है।
● क्रि प्टो करेंसी को कि सी भी क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य क्या हैं? देश की सरकार या संस्था या कि सी मालि क संचालि त नहीं कर सकते है। यह बहुत ही बड़ा disadvantage है।
● कि सी भी तरह की अगर धोखाधड़ी हो जाती है तो आप कि सी भी संस्था पर क्लेम नहीं कर सकते हैं।
● अगर आपका वॉलेट आईडी एक बार खो जाता है तो उस वॉलेट में जि तने आपके रुपए होंगे वह सब डूब जाएगा।
● क्रिप्टो करेंसी में मार्केट बहुत flexible होती है। इसमें उतार चढ़ाव होता रहता है इसलिए इसमें इन्वेस्ट करना बहुत ही रि स्की होता है।
● इसका यूज कहा होता हैं ये पता न चल पाने की वजह से गलत कामों में इसका यूज होने लगा, ड्रग्स इत्यादि में।

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